पाखंड पर कबीर के दोहे

5/5 - (1 vote)

पाखंड पर कबीर के दोहे : पाखंड एक हिंदी शब्द है जो अर्थात् “झूठ, दिखावा, बनावट” को दर्शाता है। यह एक अव्यवहारिक और असत्य दावा होता है जिसका उद्देश्य अन्य लोगों को गुमराह करना होता है। इससे लोगों को धोखा देकर अन्य व्यक्तियों के अंदर अपनी स्थिति या अधिकार को मजबूत बनाने की कोशिश की जाती है। कबीर के दोहे पाखंड पर प्रहार करते हैं।

पाखंड पर कबीर के दोहे

पाखंड पर कबीर के दोहे

पाखंडी भगति करत जो, घट में तेज नहीं धार।
त्यागि संत करै सों, जानत है सब उधार॥

हिंदी अर्थ : जो व्यक्ति पाखंडी भक्ति करता है, उसमें उसे ईश्वर की भावना के लिए जो ऊर्जा होनी चाहिए, वह नहीं होती। वह व्यक्ति जो त्यागी संत की भक्ति करता है, वह जानता है कि सब कुछ उधार में है।

कबीरा ते नर अंध है, गुरु को कहते और।
हरि रुख़ देखन को, बिना सतगुरु त्यागे मोर॥

हिंदी अर्थ : कबीर कहते हैं कि वे लोग अंधे होते हैं जो गुरु को नहीं मानते। वे लोग जो बिना सतगुरु के हरि के रुख को नहीं देखते, वे अपना सही रास्ता नहीं ढूंढ पाते हैं।

पाखंडी भजन न जाने रे, जो नर पांडित बनाय।
अंधों को दूर नहीं टिकता, काढ़े बूढ़े जाय॥

हिंदी अर्थ : व्यक्ति पाखंडी भजन को जानता है और उसे पांडित बताता है, वह अंधों से दूर नहीं जा सकता और उसे बूढ़ा होते हुए निकाल दिया जाएगा।

पांडित हो ज्यों त्यों धर्म का बोझ नहीं टार।
प्रेम गली अति सीधी, तेरे तें आवै संसार॥

हिंदी अर्थ : कबीर कहते हैं कि एक व्यक्ति जो पंडित है, वह धर्म के बोझ को उठाने में सक्षम नहीं होता है। प्रेम की गली बहुत सीधी होती है और उसी गली से संसार में आवाजाएं आती हैं। इसलिए, प्रेम की गली में चलने से बेहतर होता है।

पाखंड गए सब धरम के, धरम गया जग जहां।
जैसे कांटा बिना घावे, स्वांस नहीं लेत नहां॥

हिंदी अर्थ : पाखंडी लोग धर्म को छोड़ देते हैं और उनके छोड़ जाने से धर्म खत्म हो जाता है। इस तरह से, जैसे कि एक कांटा जब तक किसी को चोट नहीं पहुंचाता तब तक उससे साँस लेना मुश्किल होता है।

जो तो चेतन होय बिना, ध्यान धरे सब बैरी।
मत तो कोई धर्म नहीं, जो जानत सच ते पिरी॥

हिंदी अर्थ : जो व्यक्ति चेतना के बिना होता है, उसे सब बैरी दिखते हैं और उसे धर्म का ज्ञान नहीं होता है। धर्म का अर्थ सच्चाई को जानना होता है और जो लोग सच्चाई को जानते हैं, उन्हें कोई धर्म नहीं कह सकता।

पाखंडी पकड़े ते नानका, उलटे हाथ दूजे दाए।
जो सहज बिरला होवै, सो जाने अगम अपारे॥

हिंदी अर्थ : पाखंडी व्यक्ति जो होते हैं वे नानक के द्वारा पकड़े जाते हैं और उनके उलटे हाथ दूसरे लोगों को दिखाए जाते हैं। जो व्यक्ति सहज और बिरला होता है, वह अगम और अपार चीजों को जानता है।

पाखंडी जो न जाने बात, बहुरि करै बहस कराए।
ज्यों त्यों करि बहस बहुरि हारै, त्यों त्यों अपनी भाँति पार जाए॥

हिंदी अर्थ :पाखंडी व्यक्ति जो कुछ नहीं जानता है वह अन्य लोगों से बहस करता है। जैसे जैसे वह बहस करता है, वह हारता जाता है, लेकिन वह अपने तरीके से सफल होता है।

पाखंड गिरा, सो सुध बुझाये।
जब तक नाम न रहे, तब तक काम न आये॥

हिंदी अर्थ : पाखंड के अनुयायी अक्सर धर्म के नाम पर पाखंड करते हैं। कबीर जी कहते हैं कि इस प्रकार का पाखंड जला देना चाहिए। जब तक व्यक्ति धर्म के नाम पर पाखंड नहीं छोड़ता, उसका कोई काम नहीं आता।

पाखंड देखि पावक भुजाए।
सच्चा नाम तजि खाए॥

हिंदी अर्थ : कोई पाखंड करता है तो उसे पावक जलाना चाहिए। उसे सच्चे नाम को छोड़ना चाहिए। यदि व्यक्ति सच्चे नाम को छोड़ देता है, तो उसका जीवन भी पाखंडी हो जाता है।

  Rahim ke dohe class 9 | रहीम के दोहे कक्षा 9

Share this

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Alert: Content is protected !!