अस्थमा की होम्योपैथिक दवा

अस्थमा की होम्योपैथिक दवा

अस्थमा की होम्योपैथिक दवा

 

अस्थमा सामान्य परिचय

इस रोग में कफ वायुमार्ग और फेफड़ों दोनों में जमा हो जाता है और बाहर नहीं आता है या खांसने से बड़ी कठिनाई से बाहर आता है। यह रोग अक्सर दौरे का कारण बनता है। दौरे के दौरान सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। गला सूज जाता है, छाती पर भारी दबाव महसूस होता है। चेहरे और आंखों में बेचैनी है। ठंडे पसीने से माथा गीला हो जाता है। यह रोग आमतौर पर रात के अंतिम भाग में होता है। रोग का आक्रमण कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक रहता है। यह रोग वंशानुगत भी हो सकता है।

अस्थमा की होम्योपैथिक दवा

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एकोनाइट Q दमा का दौरा आरंभ होते ही दें ।

 ( 10-10 बूँद पहले 1 घंटे के अन्तर से ) । एकोनाइट 1x इन औषधियों को आधा – आधा घंटे के बाद पर्याय तथा इपिकाक 1x क्रम से देना चाहिए ।

 इनके प्रयोग से श्वास – लेने में सहायता मिलती है ।

  इसके प्रयोग से दमे का दोरा जल्दी – जल्दी आना रुक .छाती में खिंचाव, कफ का घरघराहट, गरम अथवा

 ठंडे मौसम को बर्दाश्त न कर पाना – इन लक्षणों में जिन मोटे शरीर वाले रोगियों में  .

  हेल्थ टिप्स, जो रखें आपको स्वस्थ

जब रोग का आक्रमण मध्य रात्रि में 1 से 2 बजे

 हों, उनकी बीमारी में बहुत लाभदायक है आर्सेनिक ( दिन में 4 बार )

 के बीच हो । इसे ‘ इपिकाक ‘ के बाद भी दिया जा सकता है तथा दुहराया भी जा सकता है ।

फेफड़ों में रक्त – संचय के कारण श्वास – कष्ट,

 गले में साँय – साँय की आवाज, छाती में जलन तथा ठंडा पसीना आना ।

 वृद्ध लोगों की बीमारी में विशेष हितकर है । –

अस्थमा की होम्योपैथिक दवा
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काली – बाईक्रोम 3x ( दिन में 4 बार ) यदि रोग का आक्रमण मध्य रात्रि के बाद 3-4 बजे के लगभग हो । रोगी श्वास लेने को बैठा रहे ।

तारदार कफ निकल जाने पर शान्ति का अनुभव ।

 ‘ आर्सेनिक ‘ तथा ‘ कैलिबाई ‘ के लक्षण परस्पर मिलते जुलते हैं परन्तु ‘ कैलिबाई ‘ का कफ सूतदार चिकनाई वाला एवं परिमाण में अधिक होता है, जबकि ‘ आर्सेनिक ‘ का ऐसा नहीं होता ।

 ब्लाटा ओरियेण्टलिस दौरे के समय इसके मदर – टिंक्चर की 15-20 बूंदें

 ( 10-15 बूंदें गरम गरम पानी में डालकर 15-15 मिनट के अन्तर

 पानी में डालकर )

  काली – कार्ब 30 ( दिन में 4 बार )

  इसे 3x शक्ति में भी दिया जा सकता है • इस औषध का रोग प्रात: 3-4 बजे के लगभग बढ़ता है ।

  क्यों आती है छींक

इस औषध के रोगी को दमा का खिंचाव उठने – बैठने,

 झुकने अथवा हिलने से कम होता है ।  आराम से सोते समय रोग का अचानक आक्रमण ।

लैकेसिस 200 ( 1 बार )

 किसी प्रकार का स्पर्श सहन न कर पाना ।  पतला बलगम निकलना ।

 इसे दुहरायें नहीं ।

पहले अत्यधिक परिमाण में पतला तथा ढीला कफ

 

अस्थमा की होम्योपैथिक दवा
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  कार्बो – वेज 30 ( दिन में 4 बार )

 बहुत निकलना ।  बाद में धीरे – धीरे गाढ़ा, लसदार तथा पीब जैसा श्लेष्मा निकलना । रोग के आक्रमण के समय प्राण निकलने जैसा कष्ट पेट की वायु अथवा अफारे के कारण उत्पन्न दमा ।

  वृद्धों की बीमारी में विशेष हितकर है ।

  नेट्रम – सल्फ 6x वि ०( दिन में 4 बार )

 नम मौसम अथवा नमी वाले स्थान में रहने के कारण होने वाले प्रमेह अथवा मलेरिया धातुग्रस्त कफ प्रकृति वाले मनुष्यों का दमा

बच्चों के दमा में विशेष लाभकर । इस औषध के रोग का आक्रमण प्रात: 4 से 5 बजे के बीच होता है ।

ब्रायोनिया 3 ( दिन में 4 बार )

 मल्लाहों के दमा रोग में

 खुश्क हवा से दमा का उभरना तथा समुद्री हवा में दबे रहना ।

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1 Comment

  1. अस्थमा में blatta orientalis दवा जो कि कॉकरोच से बनती है बहुत ही अच्छा काम करती है ।
    साथ मे अगर बलगम आता हो तो ipecac kali brom 30 लेने से बहुत फायदा होता है
    अगर दमा के साथ भूख कम लगे तो Lycopodium 30 का भी uses कर सकते है

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