यहां छिपा हैं जिंदगी से परेशान लोगों के लिए समाधान

यहां छिपा हैं जिंदगी से परेशान लोगों के लिए समाधानयहां छिपा हैं जिंदगी से परेशान लोगों के लिए समाधान

कुछ महसूस करते हैं कि इस पूरी दुनिया में सबसे असाध्य बीमारी उन्हें ही घेरे हुए है, वे जिस अस्वस्थता से गुजर रहे हैं उस तरह की तकलीफ दुनिया में किसी को भी नहीं। जीवन में कभी-कभी ऐसा समय आता है जब हमें लगता है कि जितनी बुरी स्थिति में हम हैं कोई दूसरा नहीं है।एक लोककथा के जरिए इस बात को समझते हैं। जंगल में एक संत रहते थे। लोग अक्सर अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए उनके पास जाते थे। एक दिन महिला सलाह लेने आई।

संत ने कहा, ‘मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं? महिला ने कहा, ‘मेरे घर में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मैं एक झोपड़ी में अपने पति और दो बच्चों के साथ रहती हूं। मैं एक बड़ा घर चाहती हूं लेकिन मेरे पति का कामकाज ठीक नहीं चल रहा है और हमारी स्थिति ऐसी नहीं है कि हम बड़ा घर ले सकें।
हमारा समय खराब चल रहा है। मेरे ससुर की नौकरी भी चली गई है और वे हमारे साथ रहने आ गए हैं। पहले ही हमारे रहने के लिए जगह कम थी लेकिन अब हम छह लोग एक छोटी सी जगह में गुजारा कर रहे हैं। इसमें बहुत दिक्कत हो रही है। मैं अब इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती। मुझे घुटन हो रही है। मेरी मदद कीजिए।’
संत ने कुछ क्षण विचार किया और कहा, ‘क्या तुम्हारे पास कोई गाय है?

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महिला ने जवाब दिया, ‘हां, हमारे पास एक गाय है तो।’ संत बोले, ‘मैं यही सलाह दूंगा कि थोड़े समय के लिए उस गाय को भी घर के भीतर ले आओ और फिर हफ्ते भर बाद मेरे पास आना।’
महिला परेशान हो गई। उसने सोचा कि महात्मा ने कुछ विचार करके ही यह सलाह दी होगी। उनके कहे में जरूर कोई चमत्कार छिपा होगा। तो उसने बात मान ली।

>बस जैसे ही यह परिवर्तन हुआ घर में कोहराम मच गया। घर में भीड़-भड़क्का हो गया। जैसी ही गाय अपना सिर दूसरी दिशा में करती तो घर के सारे सदस्यों को अपने रहने का तौर-तरीका बदलना पड़ता। घर में बदबू के कारण रहना दूभर हो गया। रात को समय-असमय गाय रंभाने लगती और सभी की नींद खुल जाती।संत ने शांति से कुछ सोचा और फिर बोले, ‘क्या तुम्हारे घर में कोई मुर्गी है?’
महिला ने कहा, ‘हां है तो।

संत बोले- ‘उसे भी एक हफ्ते के लिए अपनी झोपड़ी में ले आओ।
महिला के समझ में नहीं आया कि इससे क्या फर्क पड़ेगा लेकिन जब स्थिति पहले से ही खराब थी तो कुछ तो करना ही था। उसने सोचा कि जब पूरे गांव को संत की सलाह से फायदा पहुंचता है तो मुझे भी उनकी बात मानना चाहिए।

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घर आकर उस महिला ने संत के कहे अनुसार ही किया, उसने घर में एक मुर्गी भी रख ली। अगले कुछ दिनों में मुर्गी ने बच्चे दे दिए और पूरे घर में मुर्गियां ही मुर्गियां ही हो गईं। अब तो यह जगह बिलकुल नरक हो गई।
अगले हफ्ते वह महिला फिर संत के पास पहुंची और रोते हुए बोली, ‘लगता है आपका सिर फिर गया है। आपकी सलाह ने मेरा जीवन नरक बना दिया। अब तो उस झोपड़ी में रहना संभव ही नहीं है। गाय के कारण पूरे घर में बदबू आती है। मुर्गियों ने जीना मुहाल कर दिया है। घर के सभी लोग शिकायत करते हैं कि यहां रहना कितना कठिन है। खाना-पीना सबकुछ दुश्वार हो गया है। मेरे पति अब रोज मुझसे झिकझिक करते हैं कि घर की क्या हालत हो गई है और कहते हैं कि यह मेरा किया धरा है।
संत ने कहा, ‘पुत्री घर जाओ और आखिरी सलाह और मानो। गाय और मुर्गी को घर से बाहर कर दो।’ इस बार महिला ने सलाह इसलिए मान ली क्योंकि उससे कुछ तो बदल रहा था। वह घर आई और उसने गाय और मुर्गी को बाहर कर दिया। एक सप्ताह बाद वह महिला फिर से संत के पास आई।

उन्होंने पूछा, ‘अब जीवन कैसा है?

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महिला ने कहा, ‘आभारी हूं। आप बहुत बुद्धिमान हैं। अब जीवन बहुत शांतिपूर्ण हो गया है।’ संत मुस्कुराए।
कहानी बताती है कि अक्सर हम अपनी स्थितियों से अप्रसन्ना रहते हैं और जब चीजें और भी खराब हो जाती हैं तो हमें लगता है कि पहले की स्थिति ज्यादा बुरी नहीं थी।

आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ते हुए हमें यही सीखने की जरूरत है कि जो भी हमारे साथ घटता है उसे स्वीकार करें। खुशी तभी होती है जब हम खुश रहना सीख लेते हैं वरना इस दुनिया में कोई भी प्रसन्न कहां।

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