कर्म के दोहे

कर्म के दोहे

कर्म के दोहे मनुष्य अपने जीवन में प्रत्येक क्षण कर्म करता रहता है । हर कर्म दो प्रकार के होते हैं या तो अच्छे कर्म होते हैं या बुरे । सभी महापुरुष अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देते हैं ।

Table of Contents

कर्म के दोहे

अपने अपने नीड़ की, अपनी अपनी पीर।
हर बंदे के कर्म ही, हैं उसकी तकदीर।।


कर्म के दोहे

करम हीन रहिमन लखो, धँसो बड़े घर चोर।
चिंतत ही बड़ लाभ के, जागत ह्वै गो भोर॥


पाप पुण्य संसार में, हैं कर्मों के भोग।
सुख-दुख पाना जीव का ,मात्र नहीं संयोग।।


हर किसी के कर्म का, दाता रखे हिसाब।
देना होगा ईश को ,हर कर्म का जवाब।।


चाँदी सोना धन सभी, हैं जग में बेकार।
सद कर्मों से जीव का, होता बेड़ा पार।।


झूठ नहीं टिकता कभी, इसका ले संज्ञान ।
तेरे सच्चे कर्म से, खुश होंगे भगवान।।


जीवन बीतेगा यह, कर्मों के अनुकूल।
तज मत अच्छे कर्म तू, होगी भारी भूल।।


जग में आया छोड़कर, जब तू अपना धाम।
धन अर्जन के कर्म में, भूल गया तू राम।।

Share this
  Rahim ke Dohe class 7 | रहीम के दोहे कक्षा 7

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *