सिकंदर का इतिहास और जीवनी | Biography of Alexander the Great In Hindi

सिकंदर का इतिहास Alexander the Great Biography in Hindi

सिकंदर का इतिहास

सिकंदर का इतिहास मैसेडोनिया के अलेक्जेंडर III या सिकंदर का जन्म उनके पिता फिलिप द्वितीय के यहां पेला में 357 ईसा पूर्व में हुआ था सिकंदर ने सिर्फ 20 वर्ष की आयु में उन्होंने मिस्र से लेकर उत्तर-पश्चिम भारत तक प्राचीन दुनिया में सबसे महान साम्राज्यों में से एक की स्थापना की थी। इस अजेय योद्धा को इतिहास के सबसे सफल सेनापतियों में से एक माना जाता है।

सिकंदर की जीवनी

पुरा नाम Full Name अलेक्जेंडर द ग्रेट

जन्म तारीख Date of Birth 356 ईसा पूर्व

जन्म स्थान Place of Birth मैसेडोन , प्राचीन ग्रीस

मृत्यु Death 323 ईसा पूर्व

बेबीलोन , मेसोपोटामिया

राष्ट्रीयता  Nationality यूनानी 

पारिवारिक जानकारी Family Information

पिता का नाम Father’s Name  फिलिप द्वितीय

माता  का नाम Mother’s Name ओलंपिया

पत्नी का नाम Spouse Name

रोक्साना 

स्टेटिरा II

पेरिसेटिस 

अन्य जानकारी Other Information

सम्मान Awards विश्व विजेता 

गुरु का नाम अरस्तू 

घोड़े का नाम (Horse’name) बुसेफेल्स

सिकंदर का इतिहास 

सिकंदर महान मैसेडोनिया का राजा था – एक ऐसा साम्राज्य जो उत्तरी ग्रीस से मिस्र और सुदूर पूर्व तक फैला था, जिससे यह पुरातनता के सबसे शक्तिशाली साम्राज्यों में से एक बन गया।

सिकंदर महान का जन्म शायद 20 जुलाई, 356 ईसा पूर्व को वर्तमान ग्रीस के उत्तर में मैसेडोनिया की राजधानी पेला में हुआ था।अलेक्जेंड्रे उस समय के सर्वश्रेष्ठ अरस्तू के छात्र थे।

13 साल की उम्र में उन्हें यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने पढ़ाया था। सिकंदर ने राजनीति, भौतिक और प्राकृतिक विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और भूगोल का अध्ययन किया था ।

युद्ध की कला उसने अपने पिता, फेलिप द्वितीय, से सीखी थी। 336 ईसा पूर्व में उनके पिता की हत्या कर दी गई थी। सिकंदर  उच्च पदों को ग्रहण करते हुए मैसेडोनिया का राजा बन गया। उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें सिकंदर महान या सिकंदर महान के रूप में जाना जाने लगा।सिकंदर III बीस वर्ष की आयु में गद्दी पर बैठा और मैसेडोनिया का विस्तार उसका मुख्य उद्देश्य था। उसने उन सभी को नष्ट करने में संकोच नहीं किया जिन्होंने उसके ताज के खिलाफ साजिश रची थी।कुछ यूनानी शहरों ने विद्रोह कर दिया था और कुरिन्थ की लीग को पूर्ववत करने की कोशिश कर रहे थे। थेब्स विद्रोह का केंद्र थे, इसने यूनान की स्वतंत्रता की भी घोषणा कर दी थी। युद्ध की घोषणा की गई और थेब्स को चकनाचूर कर दिया गया। सिकंदर के कला के प्रति सम्मान के प्रमाण के रूप में केवल नाटककार पिंडर के घर को बख्शा गया था।

अन्य पढ़े   सोनिया गांधी का जीवन परिचय

फारसी साम्राज्य की विजय

334 ईसा पूर्व को अलेक्जेंडर ने हेलस्पोंट को पार किया – यूरोपीय और एशियाई ग्रीस के बीच समुद्र की एक पट्टी, एशिया माइनर की ओर बढ़ रही थी, जहां उन्होंने पहली बार फारसियों का सामना किया और महत्वपूर्ण जीत हासिल की, गॉर्डिया पहुंचे, जहां उन्होंने “गॉर्डियन ” को काट दिया, जो भविष्यवाणी के अनुसार उसे एशिया के प्रभुत्व का आश्वासन दिया।

मकदूनियाई सेना

जब सिकंदर महान एशिया माइनर में पहुंचा, तो उसके पास छह बटालियनों में वितरित नौ हजार भाले थे, जो “फालैंग्स” बनाते थे – जिसका मुख्य हथियार ज़रिसा था – एक लंबा भाला, घुड़सवार सेना के अलावा जो हमले का आधार बनता था।

मैसेडोनिया के नेता की सैन्य शक्ति से भयभीत होकर, डेरियस III ने साम्राज्य के शांतिपूर्ण विभाजन का प्रस्ताव रखा। सिकंदर ने इनकार कर दिया और भूमध्यसागरीय तट पर अपनी विजय जारी रखी।

332 ईसा पूर्व में अलेक्जेंडर III ने मिस्र पर कब्जा कर लिया, जहां पुजारियों द्वारा उसे भगवान के पुत्र के रूप में माना जा। उन्होंने ” अलेक्जेंड्रिया ” शहर की स्थापना की जो मैसेडोनिया साम्राज्य का प्रशासनिक केंद्र बन गया। 331ईसा पूर्व में फारसी राजा, डेरियस III अंततः हार गया और सिकंदर बेबीलोन  में प्रवेश करता है।

330 ईसा पूर्व में डेरियस की मृत्यु के बाद सिकंदर को “एशिया का राजा और फारसी राजवंश का उत्तराधिकारी” माना । हर जगह सम्राट ने विजय प्राप्त लोगों का विश्वास और सम्मान प्राप्त किया। 328 ईसा पूर्व में, उन्होंने बैक्ट्रियाना के क्षत्रप की बेटी रोक्साना से शादी की, जिसके साथ एक बच्चा था।

सिकन्दर का भारत पर आक्रमण

सिकंदर का भारत पर आक्रमण सिकंदर खैबर दर्रे से होते हुए भारत की ओर बढ़ा और सिंध पहुंचा। तक्षशिला के शासक अम्भी ने आसानी से सिकन्दर के सामने आत्मसमर्पण कर दिया ।

 जब वह झेलम पहुंचा तो सिकंदर का सामना पोरस के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। हालाँकि सिकंदर ने पोरस को हरा दिया था लेकिन वह पोरस की बहादुरी और साहस से प्रभावित था।

 उसने अपना जीता राज्य उसे लौटा दिया, और उसे अपना सहयोगी बना लिया। फिर वह ब्यास नदी की ओर चल पड़ा। वह सिंध को पर कर आगे आक्रमण करना चाहता था लेकिन यूनानी सैनिक युद्ध से बहुत थके हुए थे और आगे आक्रमण नहीं करना चाहत्ते थे । भारत के गर्म मौसम उन्हें पसंद आया ।

उन्होंने सिंधु के तट भारतीय युद्ध कला के गुणों का भी अध्यन किया।

भारत में आगमन और वापसी

सिकंदर महान ने पूर्व की ओर अपनी साम्राज्यवादी योजना जारी रखी। 327 ईसा पूर्व में भारत गए, यूनानियों के लिए एक पौराणिक देश, जिसमें उन्होंने सैन्य उपनिवेशों की स्थापना की और नाइसिया और बुकेफला के शहरों की स्थापना की, यह उनके घोड़े की याद में हाइडस्पे नदी के तट पर बनाया गया था।

अन्य पढ़े   बिल गेट्स का जीवन परिचय | Bill Gates Biography In Hindi

भारत की राजनीतिक स्थिति सिकंदर के आक्रमण के अनुकूल थी।

उत्तर पश्चिम के पहाड़ी क्षेत्र से होते हुए पंजाब की ओर बढ़ते हुए यह क्षेत्र हमेशा से युद्ध का गढ़ रहा है। इसलिए उन्हें यहां तीखे विरोध का सामना करना पड़ा।

अश्वायनों का प्रतिरोध

सर्वप्रथम यहाँ के राजा हस्तिन ने पूरे 30 दिन तक अपनी राजधानी पुष्यकलावती में यूनानियों से वीरतापूर्वक लड़ाई  की। अन्त में वह मारा गया। यहां 40,000 पुरुष बन्दी बनाये गये

बियास नदी पर पहुंचने पर, उसके सैनिकों ने आगे बढ़ने से इनकार कर दिया। सिकंदर ने 324 ईसा पूर्व में वापस लौटने का फैसला किया।

नीसा का आत्मसमर्पण

यहाँ के 300 अभिजात कुलीनों ने, जिनका प्रधान अकृफिस था जिसने आत्मसमर्पण कर दिया। 300 अश्वारोही सिकन्दर की सेना में आकर मिल गये।

अश्वकायनों से युद्ध

अश्वकायन जाति ने अपने राज्य की रक्षा के लिए यूनानियों के साथ भीषण युद्ध किया, वहां 420,000 घोड़े, 38,000 पैदल और 30 हाथी थे। इस सेना का नेतृत्व उनकी रानी क्यूई फिस ने किया था।

इस युद्ध में पुरुषों की तरह महिलाओं ने भी भाग लिया। अंत में रानी की मृत्यु हो गई। उसके राज्य पर सिकंदर का अधिकार था।

आम्भी का आत्मसमर्पण

सिकंदर के सेना तक्षशिला पहुंची तक्षशिला के राजा आम्भी ने आत्मसमर्पण कर दिया उसने सिकंदर को सम्राट सुविकार  कई उपहार दिए

हाइडेस्पीच पोरस और सिकंदर का युद्ध

सिकन्दर मई 326 ई.पू. में झेलम के तट पर पहुँचा और वहाँ दूसरे तट पर पुरु की सेना भी युद्ध की प्रतीक्षा कर रही थी।दोनों और की सेना कुछ समय के लिए शिविर के साथ तैयार थी । उसी वर्ष जुलाई में नदी में बाढ़ आ गई थी सिकन्दर के सैनिकों ने रात में नदी पार की। इस तरह झेलम या हाइडेस्पीच की लड़ाई शुरू हुई।

पुरु की सेना में अच्छे धनुर्धर थे जो धनुष और उनके तीर, ढाल और कवच आदि का संचालन करते थे।पुरु की सेना के अतिरिक्त हाथी, घोड़े और रथ भी थे, परन्तु उनसे कोई लाभ नहीं हुआ।

युद्ध दिन भर चलता रहा और भारतीय असफल रहे। उनके पास लगभग तीन हजार शूरवीर और बारह हजार प्यादे थे।

पुरु की सेना पराजित हो गयी काफी सैनिक और जानवर कैदि कर लिए गया। पुरु को स्वयं शत्रु ने अचेत अवस्था में बंदी बना लिया।

पुरु को सिकंदर के सामने लाया गया। सिकंदर द्वारा यह पूछे जाने पर कि आपके साथ कैसा वयवहार किया जाये।

पुरु ने जवाब दिया कि जिस तरह से एक राजा के साथ व्यवहार किया जाता है।

 सिकंदर इस उत्तर से उत्तर से बहुत प्रसन्न हुआ और उसने कुछ अन्य जागीरों के साथ अपना राज्य उसे लौटा दिया।

पुरु की इस हार के बाद पास के अन्य सामंतों ने भी सिकंदर की आधिपत्य को स्वीकार किया।

अन्य पढ़े   विनायक दामोदर सावरकर का जीवन परिचय | Vinayak Damodar Savarkar Biography in Hindi

पोरस की पराजय के कारण

जिस समय सिकंदर ने पोरस पर आक्रमण किया, उस समय कुछ प्राकृतिक कारक पोरस को हराने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध हुए।

कार्टियस के अनुसार  रथों ने राजा पोरस को काफी नुकसान पहुंचाया क्योंकि भारी बारिश के कारण भूमि क्षतिग्रस्त हो गई थी।

 दलदली हो जाने के कारण घोड़ों के पैर नहीं रुक सकते थे, जैसे गाड़ी के पहिये डूब गए थे। हाथी भी दलदल मैं विचलित हो गया था। युद्ध के मैदान की यही स्थिति उसकी हार का मुख्य कारण बनी।

दलदली इलाका होने के कारण हाथियों के पैर खुद को ठीक से संभाल नहीं पा रहे थे। दलदल में फंसकर हाथी अपनी ही सेना को रौंदने लगे।

भारतीय सेना की टुकड़ियाँ बहुत बड़ी थीं जिन्हें युद्ध के मैदान में सुगमता से नहीं मोड़ा जा सका।

जब यूनानियों ने हाथियों के पैर काटने प्रारम्भ कर दिये तो वे उल्टे-सीधे भागने लगे थे,जिससे पोरस की सेना के बहुतसे अश्वारोही और पैदल सैनिक कुचल गये।

सिकन्दर ने कुशलता के साथ सैन्य-संचालन किया था। उसका सैन्य-संचालन पोरस की अपेक्षा अधिक उत्तम श्रेणी का था।

भारत के राजाओं में एकता नहीं थी। राजा परस्पर संघर्ष करते रहते थे और विदेशी आक्रमणकारी इसका लाभ उठाते थे। राजा आम्भी  इसका प्रमुख उदाहरण है।

सिकंदर महान की मृत्यु

सिकंदर महान की मृत्यु 13 जून, 323 ईसा पूर्व बेबीलोन, वर्तमान इराक में हुई थी।सिकंदर की मृत्यु के दो अलग-अलग कारण बताये जाते है  यूनानी लेखकों मृत्यु का विवरण प्रत्येक में थोड़ा अंतर है।

प्लूटार्क के अनुसार सिकंदर अपनी मृत्यु से लगभग 14 दिन पहले, सिकंदर ने एडमिरल नियरचुस का मनोरंजन किया और लारिसा के मेडियस के साथ रात भर और अगले दिन शराब पी।सिकंदर बुखार हो गया वह बोलने में असमर्थ हो गया। उनके स्वास्थ्य के लिए चिंतित आम सैनिकों को अभिवादन किया

डियोडोरसके अनुसार सिकंदर को हरक्यूलिस के सम्मान में बिना मिश्रित शराब का एक बड़ा कटोरा गिराने के बाद दर्द हुआ उसके बाद  कमजोरी हुई उसे बुखार नहीं हुआ लेकिन कुछ पीड़ा के बाद उसकी मृत्यु हो गई।

F .A .Q

सिकंदर कौन था ?

सिकंदर महान मैसेडोनिया का राजा था। सिकंदर महान का जन्म शायद 20 जुलाई, 356 ईसा पूर्व को वर्तमान ग्रीस के उत्तर में मैसेडोनिया की राजधानी पेला में हुआ था।अलेक्जेंड्रे उस समय के सर्वश्रेष्ठ अरस्तू के छात्र थे।

सिकंदर का जन्म कब हुआ था ?

सिकंदर महान का जन्म शायद 20 जुलाई, 356 ईसा पूर्व को वर्तमान ग्रीस के उत्तर में मैसेडोनिया की राजधानी पेला में हुआ था।

सिकंदर कहां का शासक था

सिकंदर महान मैसेडोनिया का राजा था

सिकंदर की मृत्यु कैसे हुई

सिकंदर की मृत्यु के दो अलग-अलग कारण बताये जाते है  यूनानी लेखकों मृत्यु का विवरण प्रत्येक में थोड़ा अंतर है।
सिकंदर की मृत्यु कब और कहां हुई

सिकंदर महान की मृत्यु 13 जून, 323 ईसा पूर्व बेबीलोन, वर्तमान इराक में हुई थी।

अन्य पढ़े

चंगेज खान जीवनी

एडोल्फ हिटलर का जीवन परिचय

Share this

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

error: Alert: Content is protected !!