मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय | Munshi Premchand Ka Jeevan Parichay

मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय | Munshi Premchand Ka Jeevan Parichay

मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय, शिक्षा, उम्र, विवाह, करियर, पुरस्कार, मृत्यु, मुख्य तथ्य ( Munshi premchand ka jeevan parichay, education, Age, marriage, Career, Awards, Death,)

नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको भारत के एक ऐसे महान कवि जिनका नाम मुंशी प्रेमचंद है उनके बारे में विस्तार से जानकारी देंगे मुंशी प्रेमचंद इतने प्रभावशाली व्यक्ति थे।

जिन्होंने हिंदी विषय की काया ही पलट दी वह मात्र एक ऐसे लेखक थे। जो समय के साथ बदलते गए और हिंदी विषय को एक ऊंचाई तक ले जाने का काम मुंशी प्रेमचंद जी के द्वारा किया गया।

हिंदी साहित्य के एक मशहूर और प्रभावशाली लेखक थे। प्रेमचंद का बचपन और शिक्षा काफी गरीबी में बिता। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी के काशी विद्यापीठ से प्राप्त की थी। उन्होंने दरभंगा कॉलेज से भी अपनी शिक्षा जारी रखी।

उनके शिक्षार्थी दिनों में ही उन्हें लेखन की ख्वाहिश हुई थी, और वह छोटी-छोटी कहानियाँ लिखने लगे। प्रेमचंद की कविता विविधताओं को छूने में कामयाब रही।

उन्होंने कथा, उपन्यास, नाटक, इमारती निर्माण, आदर्शवादी लेखन, सामाजिक मुद्दों पर लेखन, आदि में अपना कौशल प्रदर्शित किया।आइए जानते हैं (Munshi premchand ka jeevan parichay) के जीवन परिचय के बारे में तो इसलिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें

Munshi Premchand Ka Jeevan Parichay

मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय | Munshi premchand ka jeevan parichay

नाम – मुंशी प्रेमचंद

पूरा नाम – धनपत राय

प्रसिद्ध नाम – कलम के सिपाही

जन्म – 31 जुलाई 1880

जन्म स्थान – लमही गाँव

मृत्यु – 8 अक्टूबर 1936

नागरिकता – भारतीय

प्रमुख रचनाएं –

गोदान

व्यवसाय

 अध्यापक, लेखक, पत्रकार

भाषा – उर्दू हिंदी

मुंशी प्रेमचंद का प्रारंभिक जीवन ( Munshi Premchand ka birth )

मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के एक छोटे से गांव लमही में हुआ था मुंशी प्रेमचंद का जिस परिवार में जन्म हुआ था वह एक साधारण परिवार था उनके पिता का नाम अजायब राय था जो कि एक पोस्ट मास्टर थे और उनके दादाजी का नाम गुर सहाय जोकि सरकारी नौकरी में थे।

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जब मुंशी प्रेमचंद छोटे थे तभी एक गंभीर बीमारी के चलते उनकी माता का निधन हो गया था और इसी के कारण उनका जीवन बहुत ही संघर्षों के साथ गुजरा था। माता के निधन हो जाने के बाद मुंशी प्रेमचंद को माता पिता का प्यार नहीं मिल पाया।

उसके बाद उनके पिताजी ने दूसरा विवाह कर लिया था सौतेली मां ने कभी प्रेमचंद को प्यार ही नहीं किया इससे भी मुंशी प्रेमचंद को बहुत बुरा लग रहा था वह पहले से ही हिंदी भाषा में पढ़ने की रुचि रखते थे उन्होंने बचपन से ही छोटे-छोटे उपन्यासों को पढ़ना प्रारंभ कर दिया।

इसी के कारण उन्होंने एक पुस्तक के थोक व्यापारी के यहां नौकरी करना प्रारंभ कर दिया जिससे वह अपना पुस्तक पढ़ने का चौक उसी दुकान में कर लेते थे। मुंशी प्रेमचंद बहुत ही दयालु व्यक्ति थे। हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए ही खड़े रहते थे। किसी भी बात पर वह बहस नहीं करते थे अध्यात्मा पर भी बहुत विश्वास रखते थे।

जिसके लिए मैं मंदिर भी जाया करते थे घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसीलिए उन्होंने एक वकील के यहां नौकरी की थी मुंशी प्रेमचंद एक ऐसे व्यक्ति थे। जिन्होंने हर संघर्ष को हंसते ही हंसते डाल दिया वह कभी भी कितने भी बड़े संघर्ष पर मनोबल नहीं तोड़ते थे उन्हें अपने आप पर इतना आत्मविश्वास था कि वह जो काम करेंगे वह पूरा होगा।

मुंशी प्रेमचंद की प्रारंभिक शिक्षा (Munshi Premchand Education)

मुंशी प्रेमचंद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा 7 वर्ष की उम्र में प्रारंभ कर दी थी मुंशी प्रेमचंद की शिक्षा का अध्ययन उनके परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण काफी प्रभावित हुआ। इसलिए अपनी शिक्षा को पूरा करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।

प्रेमचंद की प्रारंभिक शिक्षा उन्हें उनके गांव लमही में ही प्राप्त हुई। उन्होंने वहां मदरसा में अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं का अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने वाराणसी के काशी विद्यापीठ में अपनी शिक्षा जारी रखी। वहां उन्होंने माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की।

इसके पश्चात, प्रेमचंद को अध्यापन की शिक्षा जारी रखने के लिए दरभंगा कॉलेज जाना पड़ा। यहां प्रेमचंद ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और बड़ी कठिनाइयों से जैसे-तैसे मेट्रिक पास हुए परंतु मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन में कभी भी कितनी भी बड़ी विपत्ति में हार नहीं मानी और उन्होंने 1919 में बीए की डिग्री प्राप्त कर ली

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मुंशी प्रेमचंद का विवाह (Munshi Premchand marriage)

मुंशी प्रेमचंद का विवाह भी उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण घटना थी। उनकी शादी 8 फरवरी 1896 में हुई थी। उनकी पत्नी का नाम शिवारानी देवी था, मुंशी प्रेमचंद को कभी भी अपने परिवार का लाड प्यार और सुख प्राप्त नहीं हुआ।

उसके बाद भी पुराने रीति-रिवाजों के कारण उनके पिता ने उनकी शादी 15 वर्ष की उम्र में ही कर दी शादी प्रेमचंद की मर्जी के बिना थी। मुंशी प्रेमचंद के पिता ने एक अमीर परिवार को देखकर उनका विवाह करवा दिया। विवाह के कुछ दिन बाद कवि मुंशी प्रेमचंद की पिता की मृत्यु हो गई।

उसके बाद उनके सामने एक ऐसा समय भी आया की नौकरी के बाद भी उन्होंने अपने घर की कई बहुमूल्य वस्तुओं को बेचना पड़ा। उन्होंने दूसरा विवाह कर लिया और अपनी पहली पत्नी को तलाक दे दिया।

मुंशी प्रेमचंद का परिवार ( Munshi Premchand Family)

नाम – मुंशी प्रेमचंद

पिता का नाम – मुंशी अजायबराय

माता का नाम – आनंदी देवी

पत्नी का नाम – शिवारानी देवी

बच्चों के नाम –

अमृतराय (पुत्र) , श्रीपद राय (पुत्र)
दादा का नाम
गुर सहाय

बेटी का नाम-

कमला देवी (पुत्री)

प्रेमचंद जी की प्रमुख रचनाये के नाम (Munshi Premchand creations Name)

मुंशी प्रेमचंद भारत के बहुत महान कवि थे उन्होंने अपने जीवन में कई बड़ी रचनाएं की है वह हिंदी साहित्य के बहुत बड़े कवि रहे हैं। उन्हें उपन्यास सम्राट के नाम से भी जाना जाता है।

क्योंकि उन्होंने नाटक, और, समीक्षा, लिए लिखें कई क्षेत्रों में साहित्य सृजन किया है। उन्होंने अपने जीवन में कई रचनाएं की है। जिनमें से प्रमुख रूप से कायाकल्प, गवन, रंगभूमि और गोदान जैसी श्रेष्ठ रचनाएं हैं।

मुंशी प्रेमचंद पुरस्कार और सम्मान

मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन में कई पुरस्कार और सम्मान पाए हैं लेकिन हम उनमें से और महत्वपूर्ण पुरस्कार और सम्मान के बारे में बताएंगे जिनके बारे में आप शायद नहीं जानते होंगे आइए जानते हैं

30 पैसे मूल की डाक टिकट भारतीय डाक विभाग द्वारा मुंशी प्रेमचंद्र की याद में जारी किया गया

 प्रेमचंद साहित्य संस्था की स्थापना गोरखपुर में मुंशी प्रेमचंद्र की याद में हुई है

प्रेमचंद्र की दूसरी पत्नी शिवरानी देवी ने एक जीवनी लिखी है

मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास

मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण कृतियों के कारण जाने जाते हैं उनके सभी उपन्यास में सामाजिक मुद्दों, राजनीति, व्यापार जैसे अनेक विषयों को अपने उपन्यासों में बताया है।

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गोदान’: यह उनका सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख उपन्यास है। इस कथा में समाज की विभिन्न वर्गों के लोगों की समस्याओं, गरीबी और संघर्ष के मुद्दों को उजागर किया गया है।

* ‘रंगभूमि’ : इस उपन्यास में प्रेमचंद ने सामाजिक न्याय, राजनीति और साहित्यिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर प्रकाश डाला है।

‘कर्मभूमि’ : इस कथा में प्रेमचंद ने अपनी व्यापारिक विज्ञान को अभिव्यक्ति दी है और ब्रिटिश शासन के समय की भारतीय समाज की समस्याओं को छूने का प्रयास किया है।

* ‘गबन’: यह उपन्यास धन की प्राप्ति और उसके परिणामों पर केंद्रित है। इसमें व्यापार, सामाजिक गतिविधियों के बारे में बताएं.

मुंशी प्रेमचंद के अनमोल वचन

 किसी का दिल जीतने में समय नहीं लगता, केवल समय बिताने में समय लगता है।

जीवन की सच्ची खुशियाँ सर्वदा दूसरों की खुशियों में ही छिपी होती हैं।

यदि किसी को अनुभव सीखना है तो विपत्ति से बढ़कर कोई विद्यालय नहीं है जो विपत्ति का अनुभव सिखा दे।

मुंशी प्रेमचंद का निधन (munshi premchand ki death)

मुंशी प्रेमचंद्र का निधन 8 अक्टूबर 1936 को हो गया था मुंशी प्रेमचंद का स्वास्थ्य काफी दिनों से अस्वस्थ होने के कारण उन्होंने अपने जीवन का हाथी उपन्यास ” मंगलसूत्र” भी पूरा ना कर सके। उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सास बनारस में ली थी उन्हें कमल का जादूगर से भी जाना जाता है।

FAQs

Q. मुंशी प्रेमचंद का जन्म कहां हुआ था?
मुंशी प्रेमचंद का जन्म वाराणसी में हुआ था।

Q. मुंशी प्रेमचंद का जन्म कब हुआ था?
मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 हुआ था

Q. मुंशी प्रेमचंद कितनी रचनाएं हैं?
मुंशी प्रेमचंद 300 रचनाएं हैं।

Q. मुंशी प्रेमचंद जी की मृत्यु कब हुई ?

मुंशी प्रेमचंद जी की मृत्यु 8 अक्टूबर 1936 को हुई थी।

Q. मुंशी प्रेमचंद के माता पिता का नाम क्या था?

मुंशी प्रेमचंद के पिता का नाम मुंशी अजायबराय था तथा उनकी माता का नाम आनन्दी देवी था।

अंतिम शब्दों में दोस्तों इस लेख में हमने आपको मुंशी प्रेमचंद की जीवन ( Munshi premchand ka jeevan parichay)

के बारे में सभी जानकारी विस्तार से बताइए मुंशी प्रेमचंद मैं अपने जीवन में बहुत से संघर्षों का सामना किया है।

उन्हें बचपन से ही माता पिता का प्यार ना मिलने के बाद भी उन्होंने जीवन को बड़े ही अच्छे से जिया है हमारा मुख्य उद्देश्य इस लेख में मुंशी प्रेमचंद के बारे में बताना था।

आशा करते हैं दोस्तों हमारे द्वारा दी गई जानकारी से ( Munshi premchand ka jeevan parichay) आप खुश होंगे। इसी प्रकार की और भी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट जरुर करें और यह सभी जानकारी आप अपने मित्रों को टि्वटर इंस्टाग्राम फेसबुक के माध्यम से शेयर कर सकते हैं।

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