Lakshmi Chalisa in Hindi | लक्ष्मी चालीसा

Lakshmi Chalisa in Hindi लक्ष्मी चालीसा माता लक्ष्मी की स्तुति है इसका नित्य पाठ करने से आपको माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

Lakshmi Chalisa in Hindi

श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Lakshmi Chalisa in Hindi)

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

अर्थ: हे माँ लक्ष्मी कृपया मेरे हृदय में निवास करें हे मेरी मनोकामना पूर्ण करो और मेरी आशाओं को पूर्ण करो।

॥ Lakshmi Chalisa सोरठा॥

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

अर्थ: हे माता यही मेरी प्रार्थना है, मैं हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहा हूं कि आप यहां हर प्रकार से निवास करें। आपकी जय हो हे माता, हे जगदंबिका माता।

॥ लक्ष्मी चालीसा चौपाई ॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही।
ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही ॥

अर्थ: हे सागर की बेटी, मैं केवल आपको याद करता हूं मुझे ज्ञान, बुद्धि और ज्ञान दो।

तुम समान नहिं कोई उपकारी।
सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा।
सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥

अर्थ:  हे माता लक्ष्मी आपके समान दूसरा कोई  नहीं है। हमारी आस सब प्रकार से पूर्ण हो हे जगदंबा  सभी को आपका ही सहारा है।

तुम ही हो सब घट घट वासी।
विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी।

दीनन की तुम हो हितकारी॥

अर्थ :  हे माता आप तो विश्व की कोने-कोने में निवास करने वाली हैं आपसे हमारी यही विनती है। हे जगजननी सागर की पुत्री आप कृपा से गरीबों का कल्याण होता हैं ।

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी।
कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी।

सुधि लीजै अपराध बिसारी॥

अर्थ: हे माता रानी हम नित्य आपकी वंदना करते हैं हे जगत जननी भवानी, सब पर अपनी कृपा बरसाना। हम आपकी स्तुति कैसे करें हे माँ, हमारे पापों को भूल कर और हमारा ख्याल रखो।

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी।
जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता।

संकट हरो हमारी माता॥

अर्थ: मुझ पर अपनी कृपादृष्टि रखते हुए हे जगत जननी मेरी विनती सुनिए। आप ज्ञान, बुद्धि और सुख की दाता हैं जय हो माता हमारे संकट हर लेती हैं।

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो।
चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥

जब भगवान विष्णु ने क्षीर सागर का मंथन करवाया तो उसमें से चौदह रत्न निकले। आप भी उन चौदह रत्नों में से एक थीं, जिन्होंने भगवान विष्णु की दासी बनकर उनकी सेवा की।

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा।
रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा।
लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥

अर्थ : जहाँ-जहाँ भगवान विष्णु जी ने अवतार लिया तब-तब आपने भी रूप बदलकर उनकी सेवा की। जब भगवान विष्णु ने स्वयं मानव रूप में अयोध्या में जन्म लिया था।

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं।
सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी।
विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥

अर्थ:  उस समय आपने भी जनकपुरी में जन्म लिया उनके हृदय के समीप रहे भगवान विष्णु ने आपको अपना लिया सारा जगत जानता है कि आप तीनों लोकों के स्वामी हैं।

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी।
कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई।
मन इच्छित वांछित फल पाई॥

अर्थ: आपके समान कोई दूसरी शक्ति नहीं है। हम आपकी महिमा की कितनी भी चर्चा करें वह कम है अर्थात आपकी महिमा अवर्णनीय है। मन, वचन और कर्म से जो कोई  आपकी सेवा करता है आप उसके मन की हर इच्छा पूर्ण करती है।

तजि छल कपट और चतुराई।
पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई।
जो यह पाठ करै मन लाई॥

अर्थ: छल, कपट और चतुराई को छोड़कर मन लगाकर आपकी पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा और क्या कहूं, जो कोई इस पाठ को मन से करता है।

ताको कोई कष्ट नोई।
मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि।
त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥

अर्थ:  उसे किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता है उसे मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। हे माता आप सभी दुखों को दूर करने वाले हैं मां आपकी जय हो हे मां आप सभी बाधा और बंधनों को तोड़कर मोक्ष प्रदान करने वाली हैं।

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै।
ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै।
पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥

अर्थ: जो व्यक्ति चालीसा का पाठ करता है या सुनता है या सुनाता है उसे किसी प्रकार का रोग नहीं होता है उसे पुत्र आदि धन संपत्ति भी प्राप्त होती है।

पुत्रहीन अरु संपति हीना।
अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै।
शंका दिल में कभी न लावै॥

अर्थ:  जो व्यक्ति पुत्र हीन धनहीन अंधा बहरा गरीब या किसी भी कष्ट से पीड़ित हो यदि वह आपका पूरे विश्वास के साथ पाठ करवाता है।

पाठ करावै दिन चालीसा।
ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै।
कमी नहीं काहू की आवै॥

अर्थ: यदि वह चालीस दिन का पाठ करवा दे तो हे लक्ष्मी माता आप उस पर कृपा करती हैं। चालीस दिन तक आपका पाठ करने वाले को सुख-समृद्धि और ढेर सारा ऐश्वर्य प्राप्त होता है। उसे किसी चीज की कमी महसूस नहीं होती।

बारह मास करै जो पूजा।
तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही।
उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥

अर्थ:  जो व्यक्ति बारहमासा की पूजा-अर्चना करता है उसके समान और कोई धन्य नहीं है॥ नित्य आपका पाठ करने वाले के समान संसार में कोई नहीं है॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई।
लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा।
होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥

अर्थ: हे माँ मैं कैसे स्तुति करूँ आप अपने भक्तों की परीक्षा बखूबी लेती है। जो कोई भी पूर्ण विश्वास के साथ आपके व्रत का पालन करता है उसके हृदय में प्रेम का उदय होता है और उसके सभी कार्य सफल होते हैं।

जय जय जय लक्ष्मी भवानी।
सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं।
तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥

अर्थ: हे लक्ष्मी माता, हे भवानी माता, आपकी जय हो। आप गुणों की खान हैं और सबमें निवास करने वाली हैं। इस संसार में आपका प्रताप बड़ा बलशाली है आप जैसा दयालु दूसरा कोई नहीं है।

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै।
संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी।
दर्शन दजै दशा निहारी॥

अर्थ: हे माता, अब मुझ अनाथ को भी अपनी शरण में ले। मेरे संकट को दूर करो और मुझे अपनी भक्ति का वर दो। हे माँ हमसे कोई गलती हुई हो तो हमें क्षमा कर दो दर्शन देकर एक बार भक्तों को तो देखो माँ।

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी।
तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में।
सब जानत हो अपने मन में॥

अर्थ:  हे जगत जननी माता हम आपके दर्शनों के लिए बेचैन है।  आपके होते हुए भी हम बहुत कष्ट मैं है। हे माता आप तो सर्वज्ञ है मेरे मन में क्या है आप तो सभी कुछ जानती हैं।

रुप चतुर्भुज करके धारण।
कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई।

ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥

अर्थ:  हे माता आप चतुर्भुज रूप का धारण करके मेरे कष्टों को दूर करें।  हे माता मैं आपकी प्रशंसा और किस प्रकार करूं मैं तो बुद्ध हीन मुझे बुद्धि प्रदान करें अर्थात आप की प्रशंसा करना मेरे बस में नहीं है।

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Lakshmi Chalisa दोहा

त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

दु:खों को हरने वाली माता मेरे जीवन में है दुख ही दुख है आप सभी पापों को हरण करने वाली हैं हे माता शत्रुओं का नाश करने वाली माता लक्ष्मी, जय हो, जय हो। रामदास रोज हाथ जोड़कर आपकी सुधि लेते हुए आपसे प्रार्थना करता है। हे लक्ष्मी माता अपने सेवक पर दया की दृष्टि रखो।

 

Lakshmi Chalisa Lyrics in Hindi

Lakshmi Chalisa दोहा॥

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

Lakshmi Chalisa सोरठा 

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

॥ Lakshmi Chalisa चौपाई ॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही।
ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही ॥

तुम समान नहिं कोई उपकारी।

सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा।

सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥

तुम ही हो सब घट घट वासी।

विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी।

दीनन की तुम हो हितकारी॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी।

कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी।

  Vishnu Chalisa in Hindi | विष्णु चालीसा

सुधि लीजै अपराध बिसारी॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी।

जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता।

संकट हरो हमारी माता॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो।

चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी।

सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा।

रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा।

लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं।

सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी।

विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी।

कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई।

मन इच्छित वांछित फल पाई॥

तजि छल कपट और चतुराई।

पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई।

जो यह पाठ करै मन लाई॥

ताको कोई कष्ट नोई।

मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि।

त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै।

ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै।

पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥

पुत्रहीन अरु संपति हीना।

अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै।

शंका दिल में कभी न लावै॥

पाठ करावै दिन चालीसा।

ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै।

कमी नहीं काहू की आवै॥

बारह मास करै जो पूजा।

  Saraswati Chalisa Lyrics | सरस्वती चालीसा हिंदी में

तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही।

उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई।

लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा।

होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी।

सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं।

तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै।

संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी।

दर्शन दजै दशा निहारी॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी।

तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में।

सब जानत हो अपने मन में॥

रुप चतुर्भुज करके धारण।

कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई।

ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥

॥ दोहा॥

त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से होने वाले लाभ क्या हैं ?

लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से आप धन, समृद्धि और सुख से सम्बंधित कई लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसे नियमित रूप से पाठ करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं

लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से आपकी आर्थिक लाभ हो सकता है। लक्ष्मी माता धन, आर्थिक समृद्धि का प्रतीक हैं।

लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और आपके जीवन में शुभ घटनाएं होती हैं।

लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से आपकी समस्याओं का निवारण होता है। यह आपके जीवन में सफलता की ओर अग्रसर होते है।

लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से मन को शांति मिलती है। यह आपको तनाव से मुक्ति दिलाकर स्वस्थ मानसिक स्थिति में मदद कर सकता है।

लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से आपके सामने सफलता के द्वार खुल सकते हैं और आप अपने जीवन में अधिक सफलता प्राप्त कर सकते है।

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