कर्मधारय समास परिभाषा और उदहारण Karmdharay Samas

कर्मधारय समास Karmdharay Samas

कर्मधारय समास हिंदी व्याकरण का हिस्सा है तो चलो आज जानते हैं कर्मधारय समास के विषय में

कर्मधारय समास किसे कहते हैं

कर्मधारय समास में पहला पद विशेषण था दूसरा पद विशेष से होता है कर्मधारय समास में उत्तर पद प्रधान होता है

जहाँ समस्त पदों में उपमान-उपमेय का सम्बन्ध होता है, वहाँ कर्मधारय समास होता है। इसमें उत्तरपद प्रधान होने के साथ-साथ विशेष्य अर्थात् उपमेय होता है, जबकि पूर्वपद विशेषण अर्थात् उपमान होता है।

कर्मधारय समास के दो भेद होते हैं

(i) विशेषण-विशेष्य कर्मधारय

(ii) उपमान-उपमेय कर्मधारय

कर्मधारय समास के उदाहरण

श्वेतकमल श्वेत है जो कमल
सत्पुरुष सच्चा है जो पुरुष
महाराज महान् है जो राजा
मुनिवर मुनियों में है जो श्रेष्ठ
नीलगाय नीली है जो गाय
कापुरुष कायर है जो पुरुष
प्रधानाध्यापक प्रधान है जो अध्यापक
नराधम अधम जो नर
कालीमिर्च काली है जो मिर्च
कुबुद्धि बुरी है जो बुद्धि
गुरु- भाई गुरु से सम्बन्धित है जो भाई
दहीबड़ा दही में डूबा हुआ है जो बड़ा
वन-मानुप वन में निवास करता है जो मनुष्य
कृष्णसर्प काला है जो साँप
नीलाम्बर नीला अम्ब अथवा नीला है जो अम्बर
सधर्म सद् है जो धर्म
पीताम्बर पीला है जो अम्बर (वस्त्र)
महादेव महान है जो देव

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दुश्चरित्र बुरा है जो चरित्र

सत्पुरुष सत् (अच्छा) है जो पुरु

महाविद्या महान् है जो विद्या

श्वेताम्बर / श्वेतवस्त्र सफेद है जो वस्त्र

पीतपृष्ठ पीला है जो पृष्ठ

शुभाग शुभ है जो आग

  महात्मा महान् है जो आत्मा

मानवोचित मानवों के लिए है जो उचित

सद्गुड सत् (अच्छे) हैं जो गु

पुरुष – रत्न पुरुषों में है जो रत्न

लोह पुरुष लोहे के सामान

पुरुष बुद्धि बल बुद्धि के समान

 कुसुम कोमल कुसुम के समान कोमल

गुरुदेव गुरु के समान देव

अल्प बुद्धि अल्प जिसकी बुद्धि

अजातशत्रु नहीं पैदा हुआ हो जिसका शत्रु
यशोधन यस के समान धन

अनाथ इसका नहीं है कोई स्वामी

धर्मात्मा धर्म में आत्मा

मनचला  मन में रहता है जो चलायमान

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