स्वपंनदोष के कारण


स्वपंनदोष क्या है
स्वपंनदोष के कारणरात तथा दिन के समय  गहरी नीद मे सोते हुये बिना सम्भोग किये ही  विर्य का स्खलित हो जाना स्व्प्न्दोष कह्लाता है ।कुछ उदाह्रण सभी पाये जाते जिनमे स्व्प्न मे कुछ भी नही दिखाई देता फिर भी वीर्य का स्खलित हो जाता है । वीर्य  स्खलित होने के बाद जब निद्रित वयिक्त कि आंख खुलती है तो वह वस्त्र को वीर्य से तर पाता है ।
य्ह रोग प्राया नवयुवको को अधिक सताता है जो लोग विवाहित नही है तथा स्त्री प्रसंग का अवसर नही मिलता ये ही इससे ग्रस्त पाये जाते है ।महीने मे दो चार बार विर्य का स्खलित हो जाना स्व्प्न्दोष नही कह्लाता है क्योकि जब वीर्याशय वीर्य से भर जात है तो प्राक्र्तिक रूप से उसका स्खलन हो जाता है लेकिन एक  दिन या सप्ताह मे दो या चार बार वीर्य का स्खलित हो जाना स्वपनदोष ही कह्लाता है

स्वपनदोष के कारण

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स्वपनदोष के प्रमुख कारणो मे सदा स्त्री के बारे मे सोचना अत्याधिक संयम  इसके अतिरिक्त कब्ज होन भी मुख्य कारणो मे एक हैकारण- स्वप्न दोष के अनेकों कारण हो सकते हैं ।लैकिन प्रमुख कारणों में अश्लील चिंतन,अश्लील फिल्म देखना व नारी स्मरण मुख्य हैं ।इसके अलावा पेट में कब्ज रहना, नाड़ी तन्त्र की दुर्वलता भी एसी स्थितियाँ पैदा कर सकता है।गन्दी फिल्में व गंदे फोटो देखना गंदी कहानियो व उपन्यासों को पढ़ने से हमारा अवचेतन मस्तिष्क एसी ही बातों को सोचता रहता है जिसे जागते में तो समाज के भय से पूरा नही कर पाता उसे सोते समय वह पूरा करना चाहता है। और एसे चिन्तन के फलस्वरुप जिसका चिन्तन वह पूरे समय करता रहा है वो चीजे सपने में प्रकट हो जाती हैं.और यह समपन्न हो जाता है । कभी कभी अचानक के भय लगने से भी शरीर बहुत शिथिल हो जाता है जिसके कारण शरीर के अंग प्रत्यंगो की क्रियाविधि पर मस्तिष्क का कंट्रोल कम हो जाता है फलस्वरुप कभी कभी स्वप्न दोष हो जाता है।
देर से शादी होना भी एक कारण हो सकता है ।कभी कभी प्रेमिका से या पत्नी से किसी काऱण दूरी होना जिसमें दोनो का आपस में प्रवल आकृषण हो एसी अवस्था में भी स्वप्न दोष हो जाता है।
अन्य कारणों में एक कारण ज्यादा मिर्च मसालों का प्रयोग,सुस्वादु व गरिष्ठ भोजन तथा विलासता पूर्ण रहन सहन भी इस रोग के लिए उत्तर दायी हैं ।

रोग के परिणाम- रोगी का शरीर दुवला पतला व शारीरिक कमजोरी से ग्रसित हो जाता है वीर्य की या शुक्र की हानि होती है।क्योंकि यह शुक्र  रक्त कणों से पैदा होता है । अतः अत्यधिक शुक्र क्षय व्यक्ति को कमजोर कर देता हैं अत्यधिक ग्रसित होने पर पैरों की शिथिलन व स्मरण शक्ति कमजोर होना मन में खिन्नता होना व अण्डकोषों का लटक जाना भी हो सकता है। इस रोग के रोगी का काम में मन नही लगता औऱ सम्भोग के समय अचानक लिंग में शिथिलता की स्थिति पैदा हो सकती है । और इस कारण शर्म के कारण व्यक्ति कई बार एकाकी सा जीवन विताने लगता है। रोगी का मन हमेशा काम क्रियाओं की बात सोचता रहता है। जिससे रात के समय तीव्र उत्तेजना होती है औऱ सुबह जागने के समय भी लिंग की उत्तेजना होती है।

रोग के लक्षण

भुख मे कमी पेशाब मे जलन आलस्य हाथ पैर मे जलन आंखो का गड्डो मे धस जाना आंखो के चओरो ओर काले घेरे सिर मे दर्द यादस्त की कमी आदि लक्षण दिखाई देते है ।

स्वेप्न दोष से कैसे बचें

    रोजाना व्यादयाम करने से भी शारीरिक ऊर्जा का सही इस्तेधमाल होता है और आप स्व प्नकदोष से बच सकते हैं।
     इसके साथ ही आपको सही आहार भी लेना चाहिये। विटामिन बी से भरपूर आहार लेने से भी आप इस समस्याि से बच सकते हैं।
    अपने सोने और उठने का समय भी निर्धारित करें।
    अपने मन को शांत रखिये और और स्वरयं को व्यिस्तस रखें।
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